- Get link
- X
- Other Apps
हनुमान चालीसा - Kanban बोर्ड हनुमान चालीसा - Kanban बोर्ड (अर्थ सहित) दोहे श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि। बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि॥ गुरु के चरणों की धूल से अपने मन को साफ़ कर श्रीराम के यश का वर्णन करता हूँ, जो धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष फल देता है। चौपाई 1-5 1. जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ हे हनुमानजी! आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं, तीनों लोकों में आपकी कीर्ति चमक रही है। 2. रामदूत अतुलित बलधामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ आप श्रीराम के दूत और अपार बल के धाम हैं। आप अंजनी के पुत्र और पवन के समान तेजस्वी हैं। 3. महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ आप महावीर और बजरंगी हैं। आप बुरी बुद्धि को दूर कर अच्छे विचार लाते हैं। 4. कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा॥ आपका शरीर सोने के समान चमकीला, सुंदर वस्त्र पहना हुआ है, कानों में कुंडल और बाल घुंघराले हैं। 5. हाथ बज...