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Showing posts from October, 2025

hanuman chalisa

हनुमान चालीसा - Kanban बोर्ड हनुमान चालीसा - Kanban बोर्ड (अर्थ सहित) दोहे श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि। बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि॥ गुरु के चरणों की धूल से अपने मन को साफ़ कर श्रीराम के यश का वर्णन करता हूँ, जो धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष फल देता है। चौपाई 1-5 1. जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ हे हनुमानजी! आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं, तीनों लोकों में आपकी कीर्ति चमक रही है। 2. रामदूत अतुलित बलधामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ आप श्रीराम के दूत और अपार बल के धाम हैं। आप अंजनी के पुत्र और पवन के समान तेजस्वी हैं। 3. महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ आप महावीर और बजरंगी हैं। आप बुरी बुद्धि को दूर कर अच्छे विचार लाते हैं। 4. कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा॥ आपका शरीर सोने के समान चमकीला, सुंदर वस्त्र पहना हुआ है, कानों में कुंडल और बाल घुंघराले हैं। 5. हाथ बज...

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हनुमान चालीसा अर्थ सहित | Hanuman Chalisa with Meanings हनुमान चालीसा (अर्थ सहित) / Hanuman Chalisa with Meanings ॥ दोहा ॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि। बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि॥ अर्थ: गुरु के चरणों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ करके मैं श्रीराम के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) प्रदान करता है। Meaning: By cleansing the mirror of my mind with the dust of the holy Guru's lotus feet, I describe the pure glory of Lord Rama, who grants the four fruits of life (dharma, artha, kama, moksha). 1. जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ अर्थ: हे हनुमानजी! आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं। तीनों लोकों में आपकी कीर्ति उजागर है। Meaning: Victory to Hanuman, the ocean of wisdom and virtues. Victory to the lord of monkeys, whose glory shines in all three worlds. 2. रामदूत अतुलित बलधामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥...

हनुमान चालीसा — सभी 40 दोहे अर्थ सहित

हनुमान चालीसा अर्थ सहित हनुमान चालीसा (अर्थ सहित) ॥ दोहा ॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि। बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि॥ अर्थ: गुरु के चरणों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ करके मैं श्रीराम के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) प्रदान करता है। 1. जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ अर्थ: हे हनुमानजी! आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं। तीनों लोकों में आपकी कीर्ति उजागर है। 2. रामदूत अतुलित बलधामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ अर्थ: आप श्रीराम के दूत और असीम बल के भंडार हैं। आप अंजनी के पुत्र और पवन देव के नाम से प्रसिद्ध हैं। 3. महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ अर्थ: आप पराक्रमी और वज्र जैसे शरीर वाले हैं। आप बुरी बुद्धि को दूर कर अच्छी बुद्धि का साथ देते हैं। 4. कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥ अर्थ: आपका शरीर सुनहरे रंग का है, आप सुंदर वस्त्रों में सजे हैं, कानों में कुंडल और बाल घुंघराले हैं। ...

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हनुमान चालीसा अर्थ सहित 🙏 श्री हनुमान चालीसा अर्थ सहित 🙏 1. श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि। गुरु के चरणों की धूल से मन रूपी दर्पण को स्वच्छ करता हूँ। 2. बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि॥ श्रीराम के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल देता है। 3. बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। मैं बुद्धिहीन हूँ, इसलिए पवनपुत्र हनुमान का स्मरण करता हूँ। 4. बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार॥ हे हनुमान! मुझे बल, बुद्धि और विद्या दीजिए और दुख दूर कीजिए। 5. जय हनुमान ज्ञान गुण सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ हे हनुमान! आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं, तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं। 6. राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ आप श्रीराम के दूत हैं, अंजनी के पुत्र और पवनदेव के नाम से प्रसिद्ध हैं। 7. महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ आप महाबली हैं, बुरी बुद्धि को दूर करते हैं और अच्छी बुद्धि के साथी हैं। 8...

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 यहाँ पर हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) दी गई है, जिसमें हर दोहे का हिंदी में सरल अर्थ (भावार्थ) भी साथ में दिया गया है: 🌺 हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) — अर्थ सहित (Meaning in Hindi) || दोहा || श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि। बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि॥ अर्थ: श्रीगुरु के चरणों की धूल से मैं अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ करता हूँ और फिर श्रीराम के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — इन चारों फलों को देने वाला है। || चालीसा (चालीस चौपाई) || 1. जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ अर्थ: हे हनुमानजी! आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं। तीनों लोकों में आपकी कीर्ति प्रकाशित है। 2. रामदूत अतुलित बलधामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ अर्थ: आप श्रीराम के दूत और अपार बल के धाम हैं। आप अंजनी के पुत्र और पवन के समान तेजस्वी हैं। 3. महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ अर्थ: आप महावीर और अत्यंत पराक्रमी हैं। आप मंदबुद्धि को दूर कर अच्छे विचारों के साथी हैं। 4. कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित...

Geet Govind

  🔸 Verse 1 श्रित-कमला-कुच-मण्डल धृत-कुण्डल ए। कलित-ललित-वन्-माल जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 2 दिनमणि-मण्डल-मण्डन भव-खण्डन ए। मुनिजन-मानस-हंस जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 3 कालिय-विषधर-गंजन जन-रंजन ए। यदुकुल-नलिन-दिनेश जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 4 मधु-मुर-नरक-विनाशन गरुड़-आसन ए। सुरकुल-केलि-निदान जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 5 अमल-कमल-दल-लोचन भव-मोचन ए। त्रिभुवन-भवन-निधान जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 6 जनकसुता-कृत-भूषण जित-दूषण ए। समर-शमित-दशकण्ठ जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 7 अभिनव-जलधर-सुंदर धृत-मंदर ए। श्रीमुख-चंद्र-चकोर जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 8 तव-चरणे-प्रणता वयम्-इति-भावय ए। कुरु-कुशलं प्रणतेषु जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 9 श्रीजयदेव-कवेरुदितं इदं कुरुते मृदं। मंगल-मंजुल-गीतं जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 10 राधे-कृष्णा हरे-गोविंद-गोपाला नन्दजू-को-लाला। यशोदा-दुलाला जय जय देव हरे॥

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गीत गोविंद - जयदेव 🎶 गीत गोविंद 🎶 जयदेव कृत स्तुति यह स्तुति महान भक्त कवि श्री जयदेव द्वारा रचित "गीत गोविंद" से ली गई है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के विविध रूपों और लीलाओं का अत्यंत मधुर और भावपूर्ण वर्णन किया गया है। यह स्तुति राधा-कृष्ण भक्ति का अनुपम उदाहरण है। श्रितकमलाकुचमण्डल धृतकुण्डल ए। कलितललितवनमाल जय जय देव हरे॥ दिनमणिमण्डलमण्डन भवखण्डन ए। मुनिजनमानसहंस जय जय देव हरे॥ कालियविषधरगंजन जनरंजन ए। यदुकुलनलिनदिनेश जय जय देव हरे॥ मधुमुरनरकविनाशन गरुडासन ए। सुरकुलकेलिनिदान जय जय देव हरे॥ अमलकमलदललोचन भवमोचन ए। त्रिभुवनभवननिधान जय जय देव हरे॥ जनकसुताकृतभूषण जितदूषण ए। समरशमितदशकण्ठ जय जय देव हरे॥ अभिनवजलधरसुन्दर धृतमन्दर ए। श्रीमुखचन्द्रचकोर जय जय देव हरे॥ तव चरणे प्रणता वयमिति भावय ए। ...