🔸 Verse 1
श्रित-कमला-कुच-मण्डल धृत-कुण्डल ए।
कलित-ललित-वन्-माल जय जय देव हरे॥
🔸 Verse 2
दिनमणि-मण्डल-मण्डन भव-खण्डन ए।
मुनिजन-मानस-हंस जय जय देव हरे॥
🔸 Verse 3
कालिय-विषधर-गंजन जन-रंजन ए।
यदुकुल-नलिन-दिनेश जय जय देव हरे॥
🔸 Verse 4
मधु-मुर-नरक-विनाशन गरुड़-आसन ए।
सुरकुल-केलि-निदान जय जय देव हरे॥
🔸 Verse 5
अमल-कमल-दल-लोचन भव-मोचन ए।
त्रिभुवन-भवन-निधान जय जय देव हरे॥
🔸 Verse 6
जनकसुता-कृत-भूषण जित-दूषण ए।
समर-शमित-दशकण्ठ जय जय देव हरे॥
🔸 Verse 7
अभिनव-जलधर-सुंदर धृत-मंदर ए।
श्रीमुख-चंद्र-चकोर जय जय देव हरे॥
🔸 Verse 8
तव-चरणे-प्रणता वयम्-इति-भावय ए।
कुरु-कुशलं प्रणतेषु जय जय देव हरे॥
🔸 Verse 9
श्रीजयदेव-कवेरुदितं इदं कुरुते मृदं।
मंगल-मंजुल-गीतं जय जय देव हरे॥
🔸 Verse 10
राधे-कृष्णा हरे-गोविंद-गोपाला नन्दजू-को-लाला।
यशोदा-दुलाला जय जय देव हरे॥
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