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Geet Govind

गीत गोविंद - जयदेव

🎶 गीत गोविंद 🎶

जयदेव कृत स्तुति

यह स्तुति महान भक्त कवि श्री जयदेव द्वारा रचित "गीत गोविंद" से ली गई है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के विविध रूपों और लीलाओं का अत्यंत मधुर और भावपूर्ण वर्णन किया गया है। यह स्तुति राधा-कृष्ण भक्ति का अनुपम उदाहरण है।

श्रितकमलाकुचमण्डल धृतकुण्डल ए।
कलितललितवनमाल जय जय देव हरे॥
दिनमणिमण्डलमण्डन भवखण्डन ए।
मुनिजनमानसहंस जय जय देव हरे॥
कालियविषधरगंजन जनरंजन ए।
यदुकुलनलिनदिनेश जय जय देव हरे॥
मधुमुरनरकविनाशन गरुडासन ए।
सुरकुलकेलिनिदान जय जय देव हरे॥
अमलकमलदललोचन भवमोचन ए।
त्रिभुवनभवननिधान जय जय देव हरे॥
जनकसुताकृतभूषण जितदूषण ए।
समरशमितदशकण्ठ जय जय देव हरे॥
अभिनवजलधरसुन्दर धृतमन्दर ए।
श्रीमुखचन्द्रचकोर जय जय देव हरे॥
तव चरणे प्रणता वयमिति भावय ए।
कुरु कुशलं प्रणतेषु जय जय देव हरे॥
श्रीजयदेवकवेरुदितमिदं कुरुते मृदम् ।
मंगलमंजुलगीतं जय जय देव हरे॥
राधे कृष्णा हरे गोविंद गोपाला नन्द जू को लाला ।
यशोदा दुलाला जय जय देव हरे॥

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  🔸 Verse 1 श्रित-कमला-कुच-मण्डल धृत-कुण्डल ए। कलित-ललित-वन्-माल जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 2 दिनमणि-मण्डल-मण्डन भव-खण्डन ए। मुनिजन-मानस-हंस जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 3 कालिय-विषधर-गंजन जन-रंजन ए। यदुकुल-नलिन-दिनेश जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 4 मधु-मुर-नरक-विनाशन गरुड़-आसन ए। सुरकुल-केलि-निदान जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 5 अमल-कमल-दल-लोचन भव-मोचन ए। त्रिभुवन-भवन-निधान जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 6 जनकसुता-कृत-भूषण जित-दूषण ए। समर-शमित-दशकण्ठ जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 7 अभिनव-जलधर-सुंदर धृत-मंदर ए। श्रीमुख-चंद्र-चकोर जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 8 तव-चरणे-प्रणता वयम्-इति-भावय ए। कुरु-कुशलं प्रणतेषु जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 9 श्रीजयदेव-कवेरुदितं इदं कुरुते मृदं। मंगल-मंजुल-गीतं जय जय देव हरे॥ 🔸 Verse 10 राधे-कृष्णा हरे-गोविंद-गोपाला नन्दजू-को-लाला। यशोदा-दुलाला जय जय देव हरे॥

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